डॉ ईश्वर रमानी-
एक कहावत है , करेले पर नीम चढ़ा , यानी और कड़वा, ज्यादा प्रभावकारी औषधि ! इसी तरह एक एलोपैथी का डॉक्टर , तिस पर अनेक वर्षो की प्रेक्टिस और बाद में होमियोपैथी की प्रेक्टिस , ऐसे डॉक्टर, तो साधारण होमियोपैथी के डॉक्टर से भी की गुना काबिलियत रखते हैं। डॉ ईश्वर रमानी ऐसे ही हैं। फिर सैद्धांतिक प्रेक्टिस यानी मरीजो को हमेशा सच बताना।, साफ़ साफ़ यही कारण है कि मेरे जैसे नियमित संपर्क वाले व्यक्ति को भी होमियोपैथी पढने का शौक चर्रा गया। मेरे जैसे की और लोग है जो डॉ साहब की वजह से होमियोपैथी का काफ़ी ज्ञान रखने लगे। इसा सब का फ़ायदा यह हुआ कि अनेक लोग अब एलोपैथी की जहरीली दवाइयो से बचने लगे। और कइयो को बचाने भी लगे , एक क्रान्ति जैसी शुरू हुई, लूटमार भी कम हुई। कांकेर शहर में होमियोपैथी की आंधी इन्होने ही चलाई है ,इन्ही को श्रेय जाता है इस पैथी को लोकप्रिय बनाने में !
नए होमियो पैथ जिन्हे "केंट" की किताबो के मानसिक लक्षण समझ में नही आते आसानी से क्योकि अन्ग्रेजी में होते है और एक शब्द के की अर्थ होते है उसके लिए एक किताब भी उन्होंने लिखी - " हमारी मनोग्रंथिया ". वे अपने शिष्यो को भी समझाते रहे उन्हें देते रहे। ये शिष्य होमियोपैथी के डिग्रीधारी डाक्टर होते है जो उनकी होमियोपैथी थ्योरी को समझने में सक्षम होते है। (होमिओपॅथी में मानसिक लक्षणो का बहुत महत्व है ) ये किताब डाक्टर साहब के पास ही उपलब्ध है।
एक कहावत है , करेले पर नीम चढ़ा , यानी और कड़वा, ज्यादा प्रभावकारी औषधि ! इसी तरह एक एलोपैथी का डॉक्टर , तिस पर अनेक वर्षो की प्रेक्टिस और बाद में होमियोपैथी की प्रेक्टिस , ऐसे डॉक्टर, तो साधारण होमियोपैथी के डॉक्टर से भी की गुना काबिलियत रखते हैं। डॉ ईश्वर रमानी ऐसे ही हैं। फिर सैद्धांतिक प्रेक्टिस यानी मरीजो को हमेशा सच बताना।, साफ़ साफ़ यही कारण है कि मेरे जैसे नियमित संपर्क वाले व्यक्ति को भी होमियोपैथी पढने का शौक चर्रा गया। मेरे जैसे की और लोग है जो डॉ साहब की वजह से होमियोपैथी का काफ़ी ज्ञान रखने लगे। इसा सब का फ़ायदा यह हुआ कि अनेक लोग अब एलोपैथी की जहरीली दवाइयो से बचने लगे। और कइयो को बचाने भी लगे , एक क्रान्ति जैसी शुरू हुई, लूटमार भी कम हुई। कांकेर शहर में होमियोपैथी की आंधी इन्होने ही चलाई है ,इन्ही को श्रेय जाता है इस पैथी को लोकप्रिय बनाने में !
नए होमियो पैथ जिन्हे "केंट" की किताबो के मानसिक लक्षण समझ में नही आते आसानी से क्योकि अन्ग्रेजी में होते है और एक शब्द के की अर्थ होते है उसके लिए एक किताब भी उन्होंने लिखी - " हमारी मनोग्रंथिया ". वे अपने शिष्यो को भी समझाते रहे उन्हें देते रहे। ये शिष्य होमियोपैथी के डिग्रीधारी डाक्टर होते है जो उनकी होमियोपैथी थ्योरी को समझने में सक्षम होते है। (होमिओपॅथी में मानसिक लक्षणो का बहुत महत्व है ) ये किताब डाक्टर साहब के पास ही उपलब्ध है।
