कैलेण्डर रचना और शुभ अशुभ :-
प्राचीन काल में आदि-मानव के पास समय जानने का साधन नहीं था। उसने निरिक्षण किया कि चन्द्रमा का एक चक्कर (पूर्णिमा से पूर्णिमा तक ) 28 दिन का होता है। तब उन्होंने इसके चार बराबर बराबर भाग किये
( 7 X 4=28 ). प्रत्येक भाग (7 दिन) को सप्ताह नाम दिया। फिर हर दिन को अलग अलग नाम उस काल के विद्वान व्यक्तियों के नाम पर रखा। इस प्रकार रविवार से शनिवार नाम रखे गए। ये हो सकता था की सोमवार का नाम गुरूवार और शनिवार का नाम सोमवार रखा जाता। अत: प्रकृति के समय को मोटे तौर पर इस ढंग से नापा गया और नामकरण किया गया। अब ज़रा सोंचे कि सभी दिन तो एक समान है , फिर कौन सा दिन अच्छा या बुरा होना चाहिए ? या कड़ावार और शांतवार ,शुभ या अशुभ होना चाहिए ?इसलिए मुझे लगता है किसी वार/दिन को शुभ और अशुभ बताना दरअसल धन्धेबाजी ही है , न कि वास्तविकता।
दूसरी तरफ पश्चिमी देशो में इसी तरह सूर्य कैलेण्डर =१२ महीने(जन से दिस ) की रचना की गयी। भारतीय कैलेण्डर चन्द्र और सूर्य कैलेण्डर को समायोजित काटते हुए बनाया गया है।
हर दिन ईश्वर ने ही रचना की है ,मनुष्य ने केवल नामकरण ही किया है , इसलिए हर दिन शुभ ही होगा ,धंधेबाजों के चंगुल से दूर रहे !
प्राचीन काल में आदि-मानव के पास समय जानने का साधन नहीं था। उसने निरिक्षण किया कि चन्द्रमा का एक चक्कर (पूर्णिमा से पूर्णिमा तक ) 28 दिन का होता है। तब उन्होंने इसके चार बराबर बराबर भाग किये
( 7 X 4=28 ). प्रत्येक भाग (7 दिन) को सप्ताह नाम दिया। फिर हर दिन को अलग अलग नाम उस काल के विद्वान व्यक्तियों के नाम पर रखा। इस प्रकार रविवार से शनिवार नाम रखे गए। ये हो सकता था की सोमवार का नाम गुरूवार और शनिवार का नाम सोमवार रखा जाता। अत: प्रकृति के समय को मोटे तौर पर इस ढंग से नापा गया और नामकरण किया गया। अब ज़रा सोंचे कि सभी दिन तो एक समान है , फिर कौन सा दिन अच्छा या बुरा होना चाहिए ? या कड़ावार और शांतवार ,शुभ या अशुभ होना चाहिए ?इसलिए मुझे लगता है किसी वार/दिन को शुभ और अशुभ बताना दरअसल धन्धेबाजी ही है , न कि वास्तविकता।
दूसरी तरफ पश्चिमी देशो में इसी तरह सूर्य कैलेण्डर =१२ महीने(जन से दिस ) की रचना की गयी। भारतीय कैलेण्डर चन्द्र और सूर्य कैलेण्डर को समायोजित काटते हुए बनाया गया है।
हर दिन ईश्वर ने ही रचना की है ,मनुष्य ने केवल नामकरण ही किया है , इसलिए हर दिन शुभ ही होगा ,धंधेबाजों के चंगुल से दूर रहे !