शनिवार, 17 जून 2017

गुंडे को सुधार दिया

मैं बीकॉम में था जबकि मेरा एक मित्र बीए में पढ़ रहा था, बहुत कसरतें करता रहता था,बॉडी बनाना उसका शौक था। पर यहां तक तो ठीक था, उसे शक्ति प्रदर्शन करना भी अच्छा लगता था यानी दादागिरी।
   उसके मोहल्ले में जमादार लोग भी रहते थे जिनकी हरकते भी संस्कारवश वैसे ही रहा करती थी,उनसे मित्र का परिवार भी परेशान रहता था। अक्सर झगड़ा होता रहता था। एक दो बार मेरा दादाछाप मित्र उनको चाकू लेकर मारने भी दौड़ा था। पढ़ने लिखने में रुचि बहुत कम थी।
रोज शाम को मैं कुछ मित्रो के साथ घूमने निकला करता था तो ये दादानुमा मित्र भी मिल जाया करता था। कुछ दिन बाद मुझे सूझा इसकी लाइन ठीक किया जाए यानी सुधार जाए।
           रोज घूमते2 मैं उससे तर्क करने लगा जैसे बताओ तो यार ग्रेजुएशन के बाद क्या करने का इरादा है? तो वह जवाब देता किसी सेठ का बॉडी गार्ड बन जाऊंगा, तनखा भी अच्छी मिलेगी। कसरती बदन का उपयोग भी होगा।फिर मैं उससे पूछता,यदि सेठ पर कोई विपत्ति आयी और हमलावर तुमसे ज्यादा संख्या में हो या ज्यादा शक्तिशाली हो तो? यदि तुम्हे घायल कर दिए या विकलांग कर दिए तो सेठों के किसी काम के नही रहोगे,वे तुम्हे निकाल देंगे,ऐसा भी हो सकता है तुमसे ज्यादा ताकतवर बॉडीगार्ड मिला तो तुम्हे निकालकर उसे रख लेंगे,फिर तुम बेटोजगार हो जाओगे।
इस तरह तर्क वितर्क करने से उसका दिमाग चलने लगा, दादागिरी से मन हटने लगा, फिर दिमाग पढ़ाई की ओर खिंचने लगा, पढाई सम्बन्धी टिप्स तो मैंने दिया ही। धीरे2 वह भी पढ़ाई में लिप्त हो गया,एम ए भी कर लिया और एक दिन शिक्षा विभाग में नौकरी पा लिया।उसके पीछे छोटे भाई और पिता जी के छोटे से होटल को भी सहारा मिला, पूरा परिवार संभल गया।

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