शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

मेरे मनोवैज्ञानिक शरारते -3

दोस्त बनाता भी है और बिगाड़ता भी है ! एक अच्छा दोस्त लाखो रुपये से ज्यादा कीमती होता है !!
                             इसी देवधर शर्मा (मेरा मित्र) पर मैंने  एक और प्रयोग किया -चूँकि वह हीन  भावना से ग्रस्त था , आत्मविश्वास की कमी, क्यों कि दिखने में बदसूरत , हाईट के मामले में भी गरीब , आर्थिक स्थिति से भी गरीब , रंग में भी काला , पढ़ाई में भी कमजोर  कुल मिलाकर सभी में कमी और फलस्वरूप आत्मविश्वास की बेहद  कमी थी।  मैंने एक  लड़की की तरफ उसका  खींचा और बरगलाने लगा वो तेरे लायक है , शायद तुझको चोरी छुपे देखती भी है , तुझे पसंद भी करती है , ऐसा सुनाने में आया है ! कुछ दिनों बाद वो तो जैसे बावला ही हो गया, रात्रि में सपने में उसे दिखाई देती थी , दिन रात उसी का ध्यान आते रहता था , क्लास में वो थी तो पढते वक्त चोरी छुपे उसे देखता रहता था।  बाद में मैंने  सोंचा , यह प्रयोग तो पूरी तरह सफल रहा अब चाकरी उलटी घुमानी पड़ेगी , अन्यथा पढ़ाई बरबाद हो जायेगी।  मैंने उस लड़की के बारे में उलटी बाते कहना शुरू कर दिया  जैसे वो कोई ख़ास नहीं, बकरी जैसे टाँगे , देखने में सुन्दर भी नहीं , वो ठहरी मराठी  और तुम ब्राम्हण ,यानी संस्कार ही अलग अलग।, आदि।  धीरे धीरे कुछ दिनों में उसकी तरफ का खिंचाव जो मैंने ही उसके मन में भरा था समाप्त हो गया। और वो लाइन में आ गया।
    एक और प्रयोग मैंने किया था - नाम कमल गुप्ता पर। कालेज के  दिनों में खूब करसत किया करता था , बाड़ी तो उसने अच्छी बनाए लिया  , पर दिमाग घुटने में आ गया, पढ़ाई में ध्यान नहीं देता था । मेरे से दोस्ती होने के बाद , मैंने  ध्यान दिया -  उसके पिता  जी की एक छोटी सी होटल थी , जैसे तैसे कमा कर घर चला रहे थे , कमल सबसे बड़ा लड़का था , बाकी भाई भी पढ़ रहे थे। ये जनाब , किस्से सुनाया करते थे कि कभी किसको पिटा किसको चाक़ू लेकर दौड़ाया , कितनी संख्या में बार कर लेता हूँ ,आदि।
 मैंने सोंचा फिर धीरे धीरे उसी से  प्रश्न करना शुरू कर दिया , कि तुम आगे क्या करना चाहोगे ? जैसे पढ़ाई खत्म हो जायेगी एक दो साल में फिर ?
उसने जवाब दिया किसी सेठ का अंगरक्षक (बाड़ी गार्ड ) बन जाउगा।
मैंने पूछा -फिर ?
फिर क्या ऐसा ही चलता रहेगा।
मैंने पूछा -कब तक? एक दिन दूसरा तुमसे ताकतवर मिल जाएगा , तो तुम्हे  हटाकर , सेठ दूसरा रख लेगा ! कभी लड़ाई करते हाथ पैर टूट गया तो, इलाज भी वो बनिया शायद ही कराये ! फिर क्या करोगे ?
                                    धीरे धीरे मैंने उसे भविष्य के बारे में सोंचने को मजबूर कर दिया , फिर मेरी सलाह से उसका ध्यान पढ़ाई में लगाने लगा।  प्रोत्साहन मिलने से वह सीधा साधा हो गया।  उसने बी.ए. के बाद एम. ए.  भी कर लिया और शिक्षा विभाग में ही नौकरी मिल गयी।  पीछे अपना घर भी सम्भाल लिया , अब उसके छोटे  भाइयो ने बहुत छोटी सी होटल को बंद कर  सायकल दूकान और फोटो स्टेट की दूकान खोल ली बड़े भाई की सहायता से। उसके पिटा जी को भी काफ़ी आराम मिला इससे। फिर छोटे भाइयो ने किराना दूकान भी खोला , अब उसके घर की गरीबी भी दूर हो चुकी थी !
                                         पाठको, दोस्ती हमेशा काबिल लडको से करनी चाहिए , दोस्ती ही युवावस्था में भटकाती है , बिगाड़ती भी है , और केरियर बना भी देती है , एक अच्छा दोस्त बेहद कीमती होता है ! आगे जीवन में दोस्ती तो सिर्फ व्यवसायिक कारणो से ही होती है , जो स्वार्थ के आधार पर ही निर्भर करती है। छात्र जीवन की दोस्ती निस्वार्थ और भावनात्मक आधार पर होती है जो जीवन में फिर शायद कभी न मिले !! उसे सम्भाल कर सहेज कर रखना !

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