मंगलवार, 12 नवंबर 2013

" डौंडी वाले सर " : एक परिचय


आदरणीय " डौंडी वाले सर " : एक परिचय 


" डौंडी वाले सर " ये नाम मैंने   उन्हें श्रद्धावश दिया है।  वैसे नाम तो  श्री मंशाराम   शर्मा है।  सर को मै सन 1994 से जानता हूं। जब मुझ  दैवी आपदा आ गयी  थी मै  था।  तब दिमाग   भी काम  नहीं कर रहा था . मुसीबत में बुद्धि भी जवाब दे देती है . 
[इसका बड़ा लम्बा किस्सा है  "  ऑटो- बायो ग्राफी  "   भी मैंने लिख मारी है .] 
              एक शिक्षित व्यक्ति पर भरोसा थोड़ा जम ही जाता है।   मै घोर नास्तिक था , पूजा पाठ से कोसो दूर , अगरबत्ती जलाकर घुमाना भी ठीक से न आता होगा। लोगो पर हँसता था कि एक पत्थर पर सिंदूर लगाकर , उसे देवता  मानकर शुरू हो जाते है, पुजारी  लोग धंधा करने लगते है ,और लोग  भी अन्धों  की तरह उसके पीछे भागने लगते है ।
                सर अपने दिनों में शिक्षा विभाग में ए.डी.आई.  यानी अतिरिक्त शाला निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे , उनके एक लडके पर  आक्रमण (अभिचार कर्म ) हुआ , इलाज चालु हुआ, साथ ही यह जानकारी मिलने पर कि तांत्रिक प्रयोग  हुआ है , काफ़ी दौड़ भाग भी किया , और जैसा कि अनेको के साथ होता है, सही व्यक्ति जो निवारण कर सके , नहीं मिल पाया , नकली , ढोंगी  या अधूरा ज्ञानधारी ही मिले। काफ़ी प्रयास करते करते थक गए , हारकर  स्वयं ही सीखना शुरू कर दिए चूँकि  खुद  भी ब्राम्हण वर्ग  से है । साधना इत्यादि से , अपने पुत्र की रक्षा तो कर गए पर पूर्णत: ठीक नहीं हो पाया ! परन्तु दैवी कृपा जो उन पर बरसी। यह  तो विधि का एक बहाना था , किसी और रास्ते ले जाने का।  अब सीखी हुई विद्या नौकरी में रहते रहते जन भलाई के काम लाने लगे , हजारो की सुरक्षा हुई ,हजारो के कष्ट निवारण हुए। इससे इन्हे प्रसिद्धि भी काफ़ी मिली। छत्तीसगढ़ के साथ साथ बाहर प्रदेशो तक  लोग जानने लगे।
1994 में मै भी भटकते हुए इनके पास पहुंचा। पहले से कुछ जानकारी मेरी समस्या के बारे में थी , जो भृगु ज्योतिष और  रवेली वाले महाराज के द्वारा हुई  थी ,वह इन्होने भी बता दी।  अब दूर करने की प्रक्रिया भी इनसे कराया। चूकि मुझे ज़रा भी इन बातो में विश्वास नहीं था  और साहब शिक्षित वर्ग से आते थे अतः मै शंकाग्रस्त होकर विविध प्रकार के प्रश्न पूछते रहता था।  सर ने एक भी बात का  बुरा न मानते हुए शंका निवारण किया , और कहा वास्तव में शिक्षित वर्ग इन सब बातो को नहीं मानता , न विश्वास  करता परन्तु इन सबका अस्तित्व सचमुच है। मेरी जिज्ञासा वे भली भांति समझते हुए शंका निवारण करते।  मैंने भी  चमत्कार, प्रमाण सहित  भी देखा , बारम्बार परिणाम भी मिले, कारण सहित ! अंतत: मेरा विश्वास बढ़ गया . उन दिनों मेरी आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी 
(आज भी मै मध्यम वर्गीय हूँ , धन की देवी लक्ष्मी से शायद मेरी घोर शत्रुता है ). 
लेकिन उन परिस्थितियो में भी, उनकी बिना किसी लोभ के, जो सहायता की , उसके कारण भावनात्मक रूप में लगातार जुड़ाव महसूस करता हूँ।  चूँकि उन्होंने मुझे रास्ता दिखाया , संकट निवारण भी किया , विश्वास भी दिलाया , ये सब काम एक सद्गुरु के ही होते है शास्त्रानुसार , अत: मै  उन्हें गुरु ही मानता हूँ। परन्तु मेरा उनका सम्बन्ध बिना किसी आसक्ति  के सहज रूप से , सरल रूप से है। दैवी सिद्धिप्राप्त डौंडी वाले सर के आशीर्वाद से  मैंने स्वयं भी अनेक अनुभूतियाँ की। जो मेरे ही एक ब्लॉग  "IN SEARCH OF TRUTH "    renikjain@blogspot.com  में दिया गया है।  पाठक चाहे तो पढ़ सकते है। वर्त्तमान में ७५ वर्षीय गुरु देव का पता  मै केवल इसलिए दे रहा हूँ, ताकि मेरे जैसे मरणतुल्य   परेशानी उन्हें न उठाना पड़े और  पाठक गण , यदि किसी दैवी आपदा से पीड़ित हो तो संपर्क कर सके।
- पता :- पंडित मंशाराम जी शर्मा ,(मोबाइल -094241-23762 ,099074 -64636 )
 बस स्टैंड के पीछे ,
 ग्राम डौंडी , जिला दुर्ग (छत्तीसगढ़)
(सर का ग्राम डौंडी , भानुप्रतापपुर से दल्लीराजहरा मार्ग पर दल्लीराजहरा से १२ किलो मीटर की दुरी पर हैं।)
टीप:- दुखद सूचना मिली कि दिनांक 27/6/2018 को दोपहर करीब 1 बजे डौंडी वाले सर का स्वर्गवास हो गया, उस समय भी वे लोगो की समस्याएं ही सुन रहे थे, बिना किसी कष्ट के सुनते 2 ही सो गए और देह त्याग कर दिया।

1 टिप्पणी:

Deepak Bhardwaj ने कहा…

भाई साहब, डौंडी वाले गुरूजी की ओर घटनाएं और चमत्कारी किस्से लिखिए 🙏