मंगलवार, 5 नवंबर 2013

गांधी जी जब " इंडिया " आये : When Gandhi Ji came to "INDIA"


गांधी जी जब  " इंडिया " आये
--आर के बाफना , रायपुर (हस्तरेखा विशेषज्ञ ) (98279 -43154 )

स्वर्ग में गांधी जी बहुत बोर हो रहे थे। करने को कोई काम धाम तो था नहीं। केवल प्रभु भक्ति करते और कभी इंद्र सभा का आनद उठाते। उसमे भी मन नहीं लगता।  रह रह कर उन्हें पुराने दिन याद आते -- जब डरबन  दक्षिण अफ्रीक़ा में अंग्रेजो ने उन्हें ट्रेन से नीचे फेंका था - तो गुस्से में आकर उन्होंने अंग्रेजो को हिंदुस्तान से भगाकर ही दम लिया था। बेचैनी की हालत में उन्होंने प्रभु से प्रार्थना की ------- हे प्रभु स्वर्ग में मई बहुत बोर हो रहा हूं।  मुझे अपना हिंदुस्तान देखने की बड़ी इच्छा हो रही है कृपया मुझे मृत्युलोक भ्रमण करने की अनुमति दे। प्रभु श्री राम (नारायण) ने समझाते हुए कहा -- हे मोहनदास तुम आज का हिंदुस्तान देखने की जिद ना करो , तुम्हे बहुत दुःख होगा , परन्तु गांधी जी भी जिद में अड़े रहे। भक्त के आगे भगवान भी झुकते है , अत: भगवान को झुकना पडा। उन्होने  इस शर्त पर अनुमति दे दी की तुम अकेले ही अदृश्य रूप  में जाओगे , तुम्हारे साथ तुम्हारी रक्षा के लिए कोई "यम कामाण्डो" नही होगा चिंता की कोई बात नही , तुम्हे न तो कोई देख पायेगा , न ही कोई नुकसान पहुंचा पायेगा। तुम सब की सुन सकोगे तुम्हारी बात कोई नही सुन सकेगा। गांधी जी तैयार हो गये. और प्रभू इच्छा से सीधे हिन्दुस्तान में "लैण्ड " कर गये.


 कितना बदल गया हिन्दुस्तान , चारो और कांक्रीट की बडी बडी इमारते , आधुनिक बाग़ बगीचे ,बडी बडी फैक्ट्रिया ,अनगिनत कारे और दो पहिया. बडी प्रसन्नता के साथ गान्धी जी इधर उधर घूमने लगे. चलते चलते एक राजनीतिक पार्टी के कार्यालय में जा पहुंचे।  वहा गान्धी जी (उन्ही की) एक बडी सी तस्वीर लगी थी , गान्धी जी बडे प्रसन्न हुए, इतने बाद वर्षो बाद भी नेता और जनता उन्हें याद कर सम्मान देते है. वहा गांधीवाद के सिद्धांतो पर भाषण चल रहा था।  समोसे और जलेबियो की प्लेटो पर हाथ चलाते, झक झक से सफ़ेद कपडे  पहने नेता लोग अगले चुनाव की रणनीति भी  बनाते  जा रहे थे कि  गान्धी के नाम पर लोगो को और कैसे मूर्ख बनाया जाए , पर ये खानदानी गांधी वे स्वयं नही, कोई और था या थी  ! बातो बातो में पता चला -किसी वेदेशी महिला को वे गान्धी कहते थे. यह देख उन्हें दुःख हुआ।  थोड़ी देर में पता चल गया की उनके करकमलो से बनायी गयी एक पार्टी एक विदेशी महिला के इशारों पर नाच रही है. सभी खद्दरधारी नेता स्वार्थ सिद्धी एवं चमचागिरी में लीन है. यानी परदे के पीछे फिर विदेशी हुकूमत ! थोड़ी देर बाद सभा समाप्त हुई , कुछ को छोड़कर सभी चले गये. फिर गान्धी जी की तस्वीर के नीचे पास पास इकट्ठा हो बचे लोग अंग्रेजी शराब की बोतल खोल जाम छलकाने लगे , यह देख गान्धी जी को बडे दुखी हुए -जिन चीजो का उन्होंने विरोध किया था उसका सब उल्टा पुलटा हो रहा था , वह भी उनके नाम पर ! बडे दुखी मन से गान्धी जी वहा से मार्केट जा पहुंचे। एक किरांना  दूकान में "दांडी" नाम से नमक का पैकेट बिक रहा था। उत्सुकता से वहा रुक कर देखा तो वह आयोडिन नमक के रूप में टेक्स सहित बड़े मंहगे दामो में बिक रहा था। दांडी से उन्हें याद आया की एक दांडी मार्च उन्होंने अंगरेजो के खिलाफ किया था नमक पर टेक्स लगाने के खिलाफ ,क्योकि यह गरीबो के खिलाफ था।  अब इसी दांडी के नाम से यही नमक, नमक के ही ब्रांडो के बीच टेक्स सहित मंहगे दामो में बेचा जा रहा था ! (वैसे आयोडीन अस्थायी होता  है, रसायन शास्त्र के विद्यार्थी जानते है ) गांधी जी और दुखी हो आगे जाकर एक न्यायालय में घुस गए।  जज के पीछे गांधी की बड़ी सी तस्वीर लगी थी ,  इससे  उन्हें कुछ सुकून मिला , पर क्षणिक।  खतरनाक अपराधियों को सबूत ,गवाही और राजनितिक शरण के  चलते "बाईज्जत " बरी होते देखा और गरीबो को न्यायालय में पिसते देखा , वकीलो द्वारा लूटते देखा।  यह देख गान्धी जी को अंगरेजो का न्याय याद आने लगा।वहा से दुखी हो गाँधी जी एक पुलिस थाने  जा पहुंचे , वहा थाने के मुंशी के पीछे गान्धी जी की एक तस्वीर लगी हुई थी जिसमे आशीर्वाद की मुद्रा थी। एक निरीह व्यक्ति थाने में रिपोट लिखवाने आया था , और थाने  का मुंशी उससे पांच सौ रुपये मांग रहा था , पर गरीब के पास पांच सौ रुपये नही थे -वह दो सौ रुपये देने की बात कर रहा था।  तिस पर मुन्शी डाँटते हुए कहा- देख गान्धी जी की तस्वीर को, वे भी कह रहे है पांच सौ, हमारी नही तो गान्धी जी इज्जत का तो ख्याल कर ! गान्धी जी ने चौंक कर  अप्नी ही तस्वीर को देखा जिसमे वे आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ का पंजा फैलाए हुए थे, जिसे मुन्शी पांच का आकड़ा बता रहा था। यह देख गान्धी जी का मन, मानो टुकड़े टुकड़े  हो गया। बडे भारी मन से वे आगे बढ़ पास के पोस्ट आफिस में घुस गए , वहा सभी लिफाफों में गान्धी टिकट लगी हुई थी , उनका चेहरा घर घर में पहुँच रहा था , पर यह क्या ? पोस्टमैन इन सब टिकटो पर काले रंग की स्याही के एक मुहर द्वारा कालिख पोत  रहा था। अब गान्धी जी की सहन शक्ति जवाब दे गयी  और वे वापस स्वर्ग प्रभू के पास उडकर पहुँच गए , उडते हुते एक नजर सारे हिन्दुस्तान पर डाली, दिव्य दृष्टी  से चारो और देखा तो  सरकारी और राजनीतिक कार्यालयों में अराजकता , घूसखोरी , भ्रस्ट्राचार , मिलावट , लूटमार आदि दिखाई दिया। स्वर्ग  पहुँच कर वे प्रभु से बोले - हे प्रभु , आपने ठीक कहा था , अब मै  कभी हिन्दुस्तान जाने की जिद नही करूंगा।  प्रभू सारी बाते समझ गये , मुस्कुराते हुए बोले - तथास्तु


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