बुधवार, 20 नवंबर 2013

सरवाइकल स्पांडोलिसिस पर होमियोपैथी भारी

सरवाइकल स्पांडोलिसिस पर होमियोपैथी भारी 
आधुनिकता की देंन  है सरवाइकल स्पांडोलिसिस , यानी गर्दन में दर्द, जकड़न ! मानसिक कार्य करने वालो, झुक कर काम करने वालो , टेबल कार्य करने वालो , घर की महिलाओ को, जिन्हे गर्दन झुका कर अनाज साफ़ करने आदि कार्य करना पडता है , उन्हें अक्सर होता है।  फिर फिजिओथेरपी के चक्कर , ढेरो क्रीम , दवाइयो का प्रयोग होने लगता है। मेरी गर्दन में दर्द हुआ तो हड्डी रोग विशेषयज्ञ के पास जा पहुंचा।  गर्दन में लगाने की क्रीम आदि दिया , कुछ दवाइया भी लिख दी , पर कोई लाभ नहीं मिला। फिर एक्सरे करवाया , कुछ खास नहीं निकला। की साल इससे भी भुगतते रहा।  फिर विवेकानंद आश्रम रायपुर में ट्रेक्शन की बार दिया गया , इससे कुछ  राहत मिला , फिर मैंने ही ट्रेक्शन दने के लिए घर पर ही जुगाड़ कर लिया , इससे बहुत राहत मिली।  इसी बीच धर्म पत्नी को भी काफ़ी समय से गर्दन दर्द हो रहा था। ट्रेक्शन आदि जारी था। दवाइया आदि जारी थी पर विशेष लाभ नहीं हुआ।  इसी बीच होमिओपैथी पढते मैंने दवाइया खोज निकाली।  मैंने पत्नी को कहा कि मै दवाई दे ददूं ? पर उसने " नीम  हकीम खरे जान " कहकर ठुकरा दिया , आखिर महीनो बाद भुगतते " मरती क्या न करती " वाली स्थिति में तैयार हुई।  तीन दिन सबेरे एक डोज मैंने दिया।  पहले दिन  से ही दर्द काफ़ी कम हो गया।  तीसरे दिन तो नामो निशाँ न रहा।  गले ने पट्टा बांधना बंद हो गया। अगले सप्ताह फिर हल्का सा महसूस होने लगा।  मैंने दवाइया दुहरायी , फिर तो हमेशा क लिए ठीक हो गया , जबकि एक्सरे वगैरह करके डाक्टरो ने गर्दन की हड्डी में कुछ गैप बताया था। तो दोस्तों मेरे अनुभव से सर्वाइकल स्पाण्डोलिसिस यानी गर्दन दर्द का सबसे अच्छा उपचार होमियोपैथी में है , इसके बाद ट्रेक्शन (फिजियोथेरेपी  ) ही है। , अगर आप परेशान हो इससे चूँकि आप सभी इंटरनेट चलाने के आदि है , यानी मानसिक कार्य , तो ये होने की सम्भावना है , तो यही इलाज अजमाए , बाकी सब ऑइंटमेंट , गोलिया , कैप्सूल आदि तो दुकानदारी है।

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