यमराज की उलझन रेणीक बाफना , रायपुर
यमराज के चीफ एकाउंटेंट चित्रगुप्त आजकल बहुत टेंशन में रहने लगे थे दरअसल धर्मराज के यहाँ हिसाब किताब करते काफ़ी साल हो गए थे। तनखा भी नहीं बढ़ी थी तिस पर अत्याधिक लोगो के मरने के कारण खाता बही का काम बहुत बढ़ गया था , सुपर कंप्यूटर (पेंटियम 100 ) होने के बाद भी आखिर डाटा एंट्री तो उन्हें ही तो करना पडता था। एक दो बार अपनी परेशानी उसने यमराज से कही थी परन्तु नेताओ की संगत से वे भी पहले जैसे नहीं रहे कोरा आश्वासन देकर टाल दिया। आखिर एक दिन सब्र का बाँध टूट ही गया चित्रगुप्त ने कलम बंद हड़ताल कर ही दी -मांग रखी (१)-तनखा बढ़ाओ (2) असिस्टेंट भी चाहिए अकेला कितना खटता रहूंगा । यमराज परेशान - ढेरों मृत लोगो का हिसाब किताब पेंडिंग होने से यमलोक ही धर्मशाला बन गयी - किसे स्वर्ग और किसे नरक भेजना है निर्णय नहीं हो पा रहा था। यमराज ने कुछ झूठे सच्चे आश्वासन का चारा फेंका पर सब बेकार। चित्र गुप्ता टस से मस नहीं हो रहे थे।अब जांच करने यमराज ने अपनी सर्वे टीम भेजी आखिर वर्क लोड इतना कैसे बढ गया इतने लोग कैसे मरने लगे कि यम लोक में असिस्टेंट की जरूरत पड़ गयी। सर्वे टीम ने जांच कर बताया हुजूर नमूने के तौर पर हमने छत्तीसगढ़ की सड़के देखी। गडढे ही गढढे है बिना डामर की सड़के बनायी जा रही है नयी बनी सडको पर भी कुछ दिनों में ही अनगिनत गड्ढे हो जाते है फलस्वरूप दुर्घटनाये बढ़ गयी है और ज्यादा जानवर और आदमी मरने लगे हैं इसलिए यमलोक की आवक बढ़ गयी है। यमराज ने पूछ ऐसा क्यों ---- जांच दल ने बताया सारे राज्य और देश में भ्रष्टाचार बहुत बढ गया है ठेकेदारो ने घटिया सड़क बनाई - कभी कभी डामर भी नहीं डालते या फिर जला तेल मिलाकर सड़क बना देते है लोगो को दिखाने कि डामर डाल दिया गया है सीमेंट की सडको पर केवल रेट व गिट्टी डालकर उस पर सीमेंट व रेट का लेप चढ़ा देते है। फिर बहाना बनाते है कि बरसाती पानी से डामर घुल गया मुर्ख जनता चुप रहती है सच मानकर.
ये सब सुन यमराज ने डिपार्टमेंट के इंजीनियरों की आत्मा को
नरक से बुलवा भेजा - डांट के बाद उन्होंने भी सफाई पेश की ----क्या करे
साहब ठेकेदारो से मिला हिस्सा ऊपर के ऊपर के अधिकारियो को भी पहुँचाना पडता
है बचे पैसो से दाल रोटी का इंतजाम भी हो जाता है। सभी नेताओ और पत्रकारों
को भी खुश करना पडता है कइयो को तो महीना भी बांधना पडता है - कभी कभी
नेताओ द्वारा मांगी गयी राशि देने केवल कागजों में ही काम दिखाना पडता है
ऐसे में भ्रष्टाचार मजबूरी है- न करे तो ड्राई एरिया में भेजने या सस्पेंड
होने का भय बना रहता है
अब यमराज ने नेताओ की आत्मा को
घोर नरक से पकड़कर बुलवाया डॉट फटकार के बाद उन्होंने भी उगलना शुरू किया
---- हुजूर देशसेवा जनसेवा के महान उद्देश्य से हमने नेतागिरी शुरू की थी
-पर पब्लिक का भष्टाचार देखकर ही हमें अपना रंग ढंग बदलना पड़ा -जिन नेताओ
ने देश की आजादी के लिए सब कुछ स्वाहा कर दिया -जिन सिपाहियो ने देश की
रक्षा के लिये अपनी जान भी गँवा दी -उनके परिवारो का दुःख सुख पूछने वाला
जनता में कोई शख्श नहीं रहा -और तो और हुजूर जनता चुनाव के समय दारु मुर्गा बकरा सूअर चांवल की बोरियां जैसी चीजो की मांग करती है तभी वोट देने को तैयार होती है उच्च वर्ग वोट देने जाना पसंद नहीं करता -गरीब लोगो द्वारा शराब की बदबू फैलाते लोगो के लाइन में खड़ा होने से इज्जत घट जायेगी -माध्यम वर्ग कुछ वोट देते है कुछ नहीं -गरीब वर्ग अपना लालच पूरा करने के बाद ही
वोट देने जाता है -अनाप शनाप चुनावी खर्च करना पडता है -बाद में यही खर्च
वसूलने सरकारी धन जो जनता से करो के रूप में वसूला जाता है उसका गबन करना
पडता है इंजीनियरों को धमकाना पडता है क्या करे ये हम लोगो की मजबूरी है
यह सब सुनकर यमराज जी चक्कर खा गए इनमे से कोई भी दोषी नहीं तो दोष
किसको दे -आखिर अपने अराध्य महाकालेश्वर भगवान शंकर के पास जा पहुंचे -
भगवान शंकर ने अपना नेत्र खोला और मुस्कुराते हुए बोले ----हे यमराज मै
जानता हू तुम किस उलझन को लेकर आये हो -यमराज ने निवेदन किया--- हे प्रभु
आप सब कुछ जानते हो तो इन सबका कल्याण कीजिये - इस पर सर्वज्ञानी शंकर जी
बोले ---- हे यमराज जिस देश के लोग आजादी के साठ साल बाद भी दारु मुर्गा बकरा चावल
आदि के बाद वोट डालने जाते हो या वोट डालने जाना पसंद नहीं करते हों-
अपने अधिकारो का दुरुपयोग करते हो-उनका भला तो मैं भी नहीं कर सकता
--उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो -सडको पर -गन्दी बस्तियों में और गाँवों में
असुविधाओ के साथ मरने दो - यही उनके कर्मो का दुष्परिणाम है -इसकी बजाय
तुम चित्रगुप्त को डेली वेजेस वाला असिस्टेंट दो -और चित्रगुप्त का वेतन भी बढ़ा दो ताकि यमलोक का कार्य सुचारू रूप से चल सके
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